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SHEKHAWATI TODAY

1 अप्रेल 2017 से 16 अप्रेल 2017 तक के समाचार

सीकर

 

 

मासूम बच्ची के ज्यादती का मामला : दरिंदे के पिता ने कहा-फांसी दे दो ऐसे बेटे को

नोखा, सीकर. मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले को फांसी पर लटका देना चाहिए। फिर चाहे वह मेरा बेटा ही क्यों न हो? यह कहना है दरिंदे पवन विश्नोई के पिता मनफूल राम का। स्टेशनरी की दुकान चलाने वाले मनफूल ने कहा कि 13 साल पहले उन्होंने पवन से नाता तोड़ लिया था। दसवीं में फेल होने के बाद गलत संगत के कारण उसका आचरण बिगड़ गया। समय से पहले उसकी शादी भी कर दी लेकिन वह नहीं सुधरा। 13 साल पहले परिवार ने उसे अलग कर दिया। हमने उसी वक्त मान लिया कि वह मर चुका है। मनफूल ने बताया कि उन्हें जानकारी ही नहीं है कि उसने ऐसा घिनौना काम भी किया है। अगर उसे फांसी भी हो जाए तो हम उसकी पैरवी नहीं करेंगे।

3 माह पहले आया था सीकर, वारदात के समय नशे में था
आरोपी ने पूछताछ में कबूला है कि घटना के दिन वह नशे में धुत था। उसने डिवाइडर पर सो रही बच्ची को मौका पाकर उठा ले गया। बच्ची को गोविंदम मार्केट के पास वाली गली में ले गया और झाड़ियों में उसके साथ ज्यादती की। इसके बाद चार दिन होटल में काम करता रहा। जब फुटेज जारी हुए तो भाग गया। घरवालों से अनबन के कारण वह तीन महीने पहले सीकर आकर होटल में काम करने लगा। आरोपी पहले भी छेड़छाड़ की घटना कर चुका है।
जयपुर रेंज आईजी डीसी जैन ने बताया कि आरोपी पवन कुमार विश्नोई (38) नोखा के रासीसर गांव का है। वह कल्याण सर्किल के पास होटल में वेटर था। मंगलवार रात पुलिस को जानकारी मिली कि होटल पर काम करने वाला व्यक्ति सीकर छोड़कर गया है। इस पर देर रात एएसपी प्रकाश कुमार शर्मा, रानोली थानाधिकारी मदन कड़वासरा व दादिया थानाधिकारी अशोक चौधरी को नोखा भेजा गया। पुलिस ने आरोपी को घर से ही गिरफ्तार किया।
मामले में हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
सीकर में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, प्रमुख गृह सचिव, प्रमुख समाज कल्याण सचिव, आईजी मुख्यालय व एसपी सीकर को नोटिस जारी कर 21 सितंबर तक जवाब मांगा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश अजीत सिंह व न्यायाधीश एएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने यह अंतरिम आदेश बुधवार को अधिवक्ता प्रहलाद शर्मा की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में कहा कि 10 सितंबर को बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म कर उसे कचरे में फेंक दिया। घटना के बाद स्थानीय पुलिस व कल्याण अस्पताल के डॉक्टरों का रवैया भी गैर जिम्मेदाराना रहा। पुलिस ने न तो केस दर्ज किया और न ही बच्ची को ही तलाश किया। बाद में सुबह सात बजे मां ने ही कचरे में बच्ची को लहुलुहान पाया। डॉक्टरों ने केस दर्ज होने के बाद इलाज शुरू किया। लेकिन इलाज में देरी के कारण बच्ची की तबीयत बिगड़ गई। इसलिए आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करें और दोषी पुलिस अफसरों व डॉक्टरों सहित अन्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

आरोपियों को हो फांसी : सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनूप ढंड ने अदालत से गुहार की कि 12 साल से छोटे बच्चों से ऐसी वारदात करने वालों को फांसी हो और कानून में ऐसा प्रावधान करने के लिए विधायिका को निर्देश दिए जाएं।
इनकी मदद से पुलिस को मिला था आरोपी के बारे में सुराग
 
युसुफ सैय्यद : पुलिस को दिए थे सीसीटीवी फुटेज युसुफ सैय्यद को घटना के दूसरे दिन जब पता चला कि बच्ची को इनके घर वाले रास्ते से होकर ले जाया गया तो तुरंत घर के सीसीटीवी फुटेज देखे। इसमें दरिंदा साफ नजर आ रहा था। इन्होंने पुलिस को फुटेज मुहैया कराए। वे बताते हैं कि सीसीटीवी कितने जरूरी होते हैं यह इस घटना से साबित होता है। उन्होंने बताया कि घर में चोरी होने के बाaद सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए थे। आज इनसे शहर की बड़ी वारदात को सुलझाने में काफी मदद मिली है।
होटल कर्मचारी : भास्कर में फोटो देखते ही पहचान गए थे दरिंदे को | होटल निरोज के संचालक व जिम्मेदार कर्मचारियों ने भी आरोपी का सुराग लगाने में बड़ी भूमिका निभाई। दैनिक भास्कर में सीसीटीवी फुटेज का फोटो देखते ही इन्होंने दरिंदे को तुरंत पहचान लिया। वीडियो देखने के बाद कर्मचारियों को यकीन हो गया कि यह होटल कर्मचारी पवन विश्नोई ही है। बाद में संचालक व कर्मचारी पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने उन्हें और फुटेज दिखाए। इसके बाद इन्होंने दावा किया कि यह पवन ही है। इनकी मदद के बाद एक होटल कर्मचारी पुलिस के साथ नोखा भेजा गया।
ज्यादती के बाद बच्ची काे मारना चाहता था दरिंदा
चार साल की मासूम से दरिंदगी करने वाला दरिंदा ज्यादती के बाद मासूम को मारना चाहता था। उसने दो बार उसे मारने का प्लान भी बनाया था। खुद को बचाने के लिए उसने प्लान बदल दिया। उसे लगा कि फुटपाथ पर रहने वाले लोग हैं अगर बच्ची खुद उनके पास पहुंच जाएगी तो यहां से चले जाएंगे और उसकी करतूत उजागर होने से बच जाएगी। 
आरोपी ने पुलिस पूछताछ में यह खुलासा किया है। उसने इसीलिए बच्ची को वहां नहीं छोड़ा जहां पर उसके साथ ज्यादती की थी। सोचा कहीं बच्ची गंदे पानी में गिर जाए या फिर कुत्ते खा जाएंगे तो वह किसी भी सूरत में बच नहीं पाएगा। उसने बच्ची को जैसे ही वहां छोड़ा उसे इशारा करके रास्ता भी बताया था कि इधर से चले जाना। जिससे बच्ची अपने परिजनों के पास पहुंच जाए और वे उसे लेकर चले जाएं।
होटल में आकर काम करने लगा, फिर आधी पगार लेकर भाग गया
बच्ची को झाड़ियों में फेंकने के बाद आरोपी सीधे होटल में आया। यहां आते ही नहाया और सबूत मिटाने के लिए कई बार अपने कपड़े धोए। सुबह सात बजे ही अपने काम में लग गया। अपने गुनाह छिपाने के लिए बार बार सोचता रहा कि होटल छोड़कर चला जाए। उसके साथ काम करने वालों ने पुलिस को बताया कि वारदात के बाद उसका व्यवहार बदल गया था। वह तनाव में तो था ही बात बात पर झगड़ा भी कर रहा था। जब पुलिस ने उन दो लोगों को पकड़ लिया जिनके खिलाफ नामजद रिपोर्ट हुई थी तो आरोपी को लगा कि वह बच गया है। चार दिन तक इसी कारण होटल में काम करता रहा। जब सीसीटीवी फुटेज जारी हुए और उसने खबर पढ़ी की उन दोनों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। तभी वह यहां से भागना चाह रहा था। होटल मालिक से हिसाब करने के लिए झगड़ा किया। छह हजार रुपए उसकी तनख्वाह बन रही थी, लेकिन तीन हजार रुपए लेकर ही फरार हो गया। यहां से बीकानेर और फिर वहां से नोखा चला गया।
 
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए मां की शरण में पुलिस
दरिंदे को पकड़ने गई पुलिस टीम सबसे पहले देशनोक पहुंची। वहां पर करणी माता के दरबार में मन्नत मांगी। इसके बाद आरोपी को पकड़ने गए। वहां से वापस आते वक्त भी देशनोक मंदिर में गए और मां का शुक्रिया अदा किया।
ये भी थे टीम में शामिल : पुलिस की टीम में कांस्टेबल देवीलाल, लक्ष्मण राम, गुलाम गयूर, ताराचंद, रोहिताश, दिनेश व राजेंद्र भी शामिल थे।
 

 

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